जिम्मा
खेतो खलिहानो में ना पला बढा
ना मिली विरासत में मुझे जमीं
सरकारी कानूनों की है बडी कृपा
ना खरीद सकता हूॅं मैं इसे अभी
पानी की किल्लत थी बचपनसे
जब मिलता था भरते थे बर्तन सभी
देखे हो दिन ऐसे जिन लोगों ने
जाया करने की हिम्मत क्या होगी कभी
ना गया कभी मै जंगल जंगल
और ना तोडे है मैने पेड कभी
ना नदी नालों से मेरा पडा पाला
ना किया प्रदूषित मैंने पानी
फिर कैसे कहाॅं और क्यूॅं पेडों का
नदी नालों का जिम्मा मै अपने सर लूॅं
जब मूॅंगफली नही खाई मैंने
बिखरे छिलकों को क्यूॅं मैं झेलू
14-04-2019
ना मिली विरासत में मुझे जमीं
सरकारी कानूनों की है बडी कृपा
ना खरीद सकता हूॅं मैं इसे अभी
पानी की किल्लत थी बचपनसे
जब मिलता था भरते थे बर्तन सभी
देखे हो दिन ऐसे जिन लोगों ने
जाया करने की हिम्मत क्या होगी कभी
ना गया कभी मै जंगल जंगल
और ना तोडे है मैने पेड कभी
ना नदी नालों से मेरा पडा पाला
ना किया प्रदूषित मैंने पानी
फिर कैसे कहाॅं और क्यूॅं पेडों का
नदी नालों का जिम्मा मै अपने सर लूॅं
जब मूॅंगफली नही खाई मैंने
बिखरे छिलकों को क्यूॅं मैं झेलू
14-04-2019
Comments
Post a Comment